2022 जलवायु परिवर्तन : क्या हम बचा पाएंगे अपनी धरती को?

जलवायु परिवर्तन – जिसे हम इस धरती के बदलाव के तौर पर अकिंत कर सकते है। प्रदीर्घ बदलाओं से गुजरती हमारी धरती आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ हमें याने हम इंसानों को (जो वास्तिवक में इस बदलाव के मुख्य कारक है) व्यापक तौर पर कदम उठाने की जरूरत है। 

इस लेख में हम जलवायु परिवर्तन क्या है? इस के साथ साथ जलवायु परिवर्तन के कारण और प्रभाव क्या है? यह भी जानेंगे। साथ ही  इस धरती के प्रति हमारे कर्तव्यों को समझने की जरूरतों पर भी गौर करेंगे।

जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन

 

जलवायु परिवर्तन क्या है?

सब से पहले हमें जलवायु परिवर्तन को सही तरह से समझने की जरूरत है, जब आप छोटे थे तब से लेकर आजतक मौसम में होनेवाले बदलाव को आप ने भी महसूस किया होगा। सर्दियों के मौसम में गर्मी का होना, वर्षा में अनियमितता, मौसम के हिसाब से रहनेवाले तापमान में बढ़ोतरी, सुखा या अकाल जैसी स्थिति ने आप को भी अचरज में डालता होगा, यही तो जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा है। यही वह बदलाव है, जो अभी नही रोका गया तो शायद आनेवाली पीढ़ियों का जीवन हम खतरे में डाल देंगे। आओ सही तरीकें से जलवायु परिवर्तन को समझते है।

प्रकृति में बदलाव होना आम है? यह प्रकृति निरंतर बदलाव से ही संतुलित तरीकें से आगे बढती भी है, लेकिन प्रकृति के इस बदलाव में खतरनाक तरीकें से मानवीय हस्तक्षेप के कारण एक असंतुलन तैयार हो गया है, जैसे तापमान में होनेवाली असंतुलित वृद्धि मानवीय क्रियाओं का ही परिणाम है। मानवीय और कुछ प्राकृतिक गतिविधियों के कारण जलवायु की दशा और दिशा बदल रही है। हाल के वर्षों और दशकों में गर्मी के कई रिकॉर्ड टूट गए हैं, साथ ही ज्यादा बारिश के कारण बाढ़ के खतरे बढ़ गयें है।

माना की औद्योगिक विकास के कारण मानवीय जीवन को पुर्णतः बदल दिया है, लेकिन औद्योगिक विकास से जुड़ें खतरों को हमने नजरंदाज किया है और इन सब वजहों से जलवायु में बदलाव आ रहा है जिसे जलवायु परिवर्तन की संज्ञा दी जा रही है। 

जलवायु में हो रहे नकारात्मक परिवर्तन प्रकृति में रहने वाले जीवों के लिए बहुत ही घातक होंगे। जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों के प्रति सरकारें जागरूक हो रही हैं और लोगों को भी जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों के प्रति आगाह करने की जरूरत है। 

जलवायु परिवर्तन के कारण

जलवायु परिवर्तन के कारणों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।

  1. प्राकृतिक 
  2. मानवीय 

जहाँ जलवायु परिवर्तन के प्राकृतिक कारणों में ज्वालामुखी, महासागरीय धाराओं, महाद्वीपों के अलगाव आदि प्रमुख हैं, वहीँ मानवीय कारणों में जंगल की कटाई, औद्योगिक विकास से होनेवाला प्रदुषण, जीवाश्म इंधन और अन्य स्त्रोतों का अधिक इस्तेमाल आदि प्रमुख कारण है।

प्राकृतिक तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण

  • ज्वालामुखी की सक्रियता :- जलवायु परिवर्तन का एक प्राकृतिक कारण है ज्वालामुखी की सक्रियता क्यों की ज्वालामुखी से बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड, जलवाष्प, धूल कण तथा राख के कण वायुमण्डल में फैलते है। हालांकि, ज्वालामुखी की सक्रियता कुछ दिनों की ही हो सकती हैं, लेकिन भारी मात्रा में निकलने वाली गैसें तथा राख जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होती है।
  • महासागरीय धाराएँ :- महासागरों की जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका है। वायुमंडल या भू-सतह की तुलना में दुगुना तापमान इनके द्वारा अवशोषित किया जाता है। महासागरीय प्रवाह चारों ओर तापमान के स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार है। इनकी वजह से हवाओं की दिशा परिवर्तित कर तापमान को प्रभावित किया जाता है। तापमान को अवशोषित करने वाली ग्रीनहाउस गैस का एक अहम हिस्सा समुद्रों जलवाष्प होती है जो कि वायुमंडल में तापमान को अवशोषित करने का काम करती है।
  • मेथेन गैस का भंडार :- आर्कटिक महासागर की बर्फ के नीचे अतल गहराइयों में मेथेन हाइड्रेट के रूप में ग्रीनहाउस गैस मेथेन का विशाल भंडार है जो विशिष्ट ताप और दाब में हाइड्राइट रूप में रहता है। ताप और दाब में परिवर्तन होने पर यह मेथेन मुक्त होती है और वायुमंडल में शामिल हो जाती है। अपने गैसीय रूप में, मीथेन सबसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों में से एक है, जो कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में पृथ्वी को बहुत अधिक गर्म करती है।

मानवीय तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण

  • जंगलों की कटाई :- मनुष्य जंगलों को काट कर उसके द्वारा कई तरह का लाभ उठाता है। इसके द्वारा मिले लकड़ी को इसके सामान बनाने, जला कर खाना बनाने, मकान बनाने आदि के काम में उपयोग करता है। जंगल के साफ हो जाने के बाद वह उस जगह पर कब्जा कर के उसे खेती के लिए उपयोग करने लगता है या उसमें मकान बना लेता है। वायु को शुद्ध रखने के लिए पेड़ पौधे अति आवश्यक है। इसके अलावा भी पेड़ पौधे बहुत काम आते हैं और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए इन्हें बचाना अनिवार्य है।
  • औद्योगिक विकास से होनेवाला प्रदुषण :- औद्योगिक विकास से मानवी जीवन में क्रांति ला दी, लेकिन आप को पता है की,कारखानों को सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाला माना जाता है, क्योंकि इसके आसपास रहने से साँस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वालों में वाहनों को लिया जाता है। यह सभी वायु प्रदूषण फैलाने में अपना योगदान देते हैं। इसके अलावा भी कई ऐसे उदाहरण है, जो वायु प्रदूषण के कारक बनते हैं। वायु प्रदूषण से गर्मी बढ़ जाती है और गर्मी बढ़ने से जलवायु में भी परिवर्तन होने लगता है।
  • जीवाश्म इंधन और अन्य स्त्रोतों का अधिक इस्तेमाल :- जीवाश्म इंधन जैसे पेट्रोल,डिझेल, या अन्य किसी तरह के इंधन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते बहुत ज्यादा मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में मुक्त हो रही हैं। इसी को वैज्ञानिक भाषा में उत्सर्जन कहा जाता है। साथ ही जो जंगल इन गैसों को सोखते थे उन्हें भी हम तेजी से काट रहे है इसके चलते वातावरण में यह गैसें तेजी से बढ़ रही हैं परिणामस्वरूप ऊर्जा का जो एक संतुलन बना होता था वो बिगड़ रहा है और वातावरण कहीं तेजी से गर्म हो रहा है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप दुनिया के मानसूनी क्षेत्रों में वर्षा में काफी वृद्धि होगी जिससे बाढ़, भूस्खलन तथा भूमि अपरदन जैसी समस्याएँ निर्माण होंगी। जल की गुणवत्ता में गिरावट आएगी। स्वच्छ जल की आपूर्ति पर गम्भीर प्रभाव पड़ेंगे।

जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप ध्रुवीय बर्फ के पिघलने के कारण विश्व का औसत समुद्री जलस्तर इक्कीसवीं शताब्दी के अन्त तक 9 से 88 सेमी. तक बढ़ने की सम्भावना है, जिससे दुनिया की आधी से अधिक आबादी जो समुद्र से 60 कि.मी. की दूरी पर रहती है, पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप बाढ़, सूखा तथा आँधी-तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं की बारम्बारता में वृद्धि के कारण अनाज उत्पादन में गिरावट दर्ज होगी। स्थानीय खाद्यान्न उत्पादन में कमी भुखमरी और कुपोषण का कारण बनेगी जिससे स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेंगे। खाद्यान्न और जल की कमी से प्रभावित क्षेत्रों में टकराव पैदा होंगे।

जलवायु में उष्णता के कारण उष्ण कटिबन्धीय वनों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि होगी परिणामस्वरूप वनों के विनाश के कारण जैवविविधता का ह्रास होगा।

जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप न सिर्फ रोगाणुओं में बढ़ोत्तरी होगी अपितु इनकी नई प्रजातियों की भी उत्पत्ति होगी जिसके परिणामस्वरूप फसलों की उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। फसलों की नाशीजीवों तथा रोगाणुओं से सुरक्षा हेतु नाशीजीवनाशकों के उपयोग की दर में बढ़ोत्तरी होगी जिससे वातावरण प्रदूषित होगा साथ ही मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

जलवायु परिवर्तन के उपाय

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को देखते हुए समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि ग्रीन हाउस प्रभाव के लिये उत्तरदायी गैसों के उत्सर्जन पर रोक लगाई जाये जिससे वैश्विक तापवृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।

साथ ही जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए सभी देशों को मिलकर उपायों में निवेश करने, ग्रीन जॉब, हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण की ओर आगे बढ़ने की जरूरत है। पृथ्वी पर जीवन को बचाए रखने, इसे स्वस्थ रखने और ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर ईमानदारी से काम करना होगा। कोई देश अकेले ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से नहीं निपट सकता है।

निजी स्तर पर आप क्या कर सकते हैं?

सरकार को अपने स्तर पर बड़े और नीति-परक बदलाव करने की ज़रूरत है लेकिन बतौर जिम्मेदार नागरिक हम अपने स्तर पर भी इस प्रयास का हिस्सा बन सकते हैं। हमारे छोटे-छोटे प्रयास जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। जैसे –

  • इंधनों पर चलनेवाले वाहनों का प्रयोग कम कर सकते है।
  • हमारे आस पास जलस्त्रोंतों को जैसे नदी, तालाब को स्वच्छ रख सकते है।
  • हमारे आसपास पेड़ पौधे लगाकर जलवायु परिवर्तन को रोखने के लिए ऐसे छोटे छोटे कदम उठाना हमारे लिए भी अनिवार्य हो गया है।

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