जीवामृत क्या है | जीवामृत बनाने का विधि | जीवामृत के फायदें

जीवामृत क्या है?

किसान भाईयो जीवामृत एक अत्यधिक प्रभावशाली जैविक खाद है। जिसे गोबर के साथ पानी मे कई और पदार्थ मिलाकर तैयार किया जाता है। जो पौधों की वृद्धि और विकास में सहायक है। यह पौधों की विभिन्न रोगाणुओं से सुरक्षा करता है तथा पौधों की प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाता है जिससे पौधे स्वस्थ बने रहते हैं तथा फसल से बहुत ही अच्छी पैदावार मिलती है।

जीवामृत क्या है
जीवामृत क्या है

जीवामृत को किस तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है?

  • जीवामृत का प्रयोग करते समय यदि मिट्टी नम हो जीवामृत ज्यादा फायदेमंद होता है।
  • जब मिट्टी नम हो, तो स्प्रे पम्प से फसलों की रिक्त पंक्ति में मिट्टी पर साधारण स्प्रे स्प्रे करें।
  • बोए गए बीज (जैसे कपास, मिर्च, केला, पपीता, आदि) को पौधे के आकार के आधार पर 250 से 500 मिलीलीटर प्रति पौधे डालें।
  • फसलों की सिंचाई करते समय मुख्य चारे की धार (पाइप या गमला) पतली होनी चाहिए। यह पानी आगे जाकर फसल की जड़ों तक जाता है।
  • कुछ किसान पतला आटा बनाने के लिए सारी सामग्री की मात्रा बढ़ा देते हैं। ऐसे थोड़े गाढें जीवामृत को बोरे में भरकर पानी के पाइप के मुहाने के नीचे रख दिया जाता है। यह पानी के साथ खेत में फैल जाता है।
  • ड्रिप सिंचाई विधि के मामले में, इसे छानने के बाद भी देना होगा। अन्यथा पार्श्व और उत्सर्जक बंद हो सकते हैं।
  • जीवामृत को अच्छी तरह से छानकर भी फसलों पर  स्प्रे पंप की मदद से छिड़काव किया जा सकता है।

फसल को दी जाने वाली प्रत्येक सिंचाई के साथ 200 लीटर जीवामृत का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से उपयोग किया जा सकता है, अथवा इसे अच्छी तरह से छानकर टपक या छिड़काव सिंचाई के माध्यम से भी प्रयोग कर सकते है, जो कि एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होता है। छिड़काव के लिए 10 से 20 लीटर तरल जीवामृत को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

जीवामृत के लिए लगने वाली सामग्री 1 एकड़ का अनुपात में 

  1. बरगद या पीपल के पेड़ (जिसे बड भी कहाँ जाता है)  की जड़ों के नीचे एक से दो मुट्ठी मिट्टी। ( माना जाता है की बरगद या पीपल के पेड़ की जड़ों में सबसे अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं।)
  2. 3-4 दिन बासी गोमूत्र…. करीब 10-12 लीटर। (अगर आप के घर देसी गाय है तो आप इसे जमा कर सकते है, या किसी गौशाला से आप इसे खरीद भी सकते है )
  3. गाय का गोबर 10-12 किग्रा. (एक गमले बहुत है। ताजा मिले तो बहुत अच्छा है, लेकिन न मिले तो 2-3 दिन तक भी काम आता है।)
  4. 1 किलोग्राम पुराना सड़ा हुआ गुड़। गुड़ मिले तो बहुत अच्छा नही तो इस के लिए आप 4 से 5 लीटर गन्ने के रस का भी इस्तेमाल कर सकते है।
  5. 100 ग्राम शहद (मार्केट में आसानी से शहद उपलब्ध हो जाता है।)
  6. गाय का घी 50 ग्राम
  7. 1 किलो बेसन या किसी भी दाल का आटा (अगर बेसन उपलब्ध ना हो तो किसी भी दाल का आटा, या गेहु या जवार के आटे का भी प्रयोग आप कर सकते है।)
  8. 170  लीटर पानी साथ ही इस के लिए 200 लीटर वाली प्लास्टिक या सीमेंट की टंकी
  9. अगर उपलब्ध हो तो 2 से 3 लीटर छांछ

जीवामृत बनाने का विधि 

ये सब सामग्री इकट्ठा करके सबसे पहले 10 किलोग्राम देशी गाय का गोबर, 10 लीटर देशी गौमूत्र, 1 किलोग्राम पुराना सड़ा हुआ गुड़ या 4 लीटर गन्ने का रस, 1 किलोग्राम किसी भी दाल का आटा, 1 किलोग्राम सजीव मिट्टी एवं 200 लीटर पानी को एक मिट्टी के मटके या प्लास्टिक के ड्रम में डालकर किसी डंडे की सहायता से इस मिश्रण को अच्छी तरह हिलाये जिससे ये पूरी तरह से मिक्स हो जाये। अब इस मटके या ड्रम को ढक कर छांव मे रखदे। इस मिश्रण पर सीधी धूप नही पड़नी चाहिए।

अगले दिन इस मिश्रण को फिर से किसी लकड़ी की सहायता से हिलाए, 6 से 7 दिनों तक इसी कार्य को करते रहे। लगभग 7 दिन के बाद जीवामृत उपयोग के लिए बनकर तैयार हो जायेगा। यह 200 लीटर जीवामृत एक एकड़ भूमि के लिये पर्याप्त है।

जीवामृत के फायदें

  • यद्यपि मिट्टी सभी फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है, लेकिन यह फसलों के लिए उपलब्ध नहीं है।
  • यदि मिट्टी में जीवाणु होते हैं, तो वे अपने जीवन चक्र के माध्यम से फसल को मिट्टी या पर्यावरण से सही समय पर उपलब्ध कराते हैं। नतीजतन, सफेद जड़ों की संख्या और आकार बढ़ जाता है।
  • जीवामृत के प्रयोग से मिट्टी में जीवाणुओं की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती है।इनकी संख्या बढ़ने से वायु में नाइट्रोजन के अवशोषण की दर बढ़ जाती है।
  • फसल को नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।इसलिए, फसल का विकास जोरदार है। फसल उज्ज्वल, जीवंत और स्वस्थ दिखती है।
  • जैविक खेती में, कार्बनिक पदार्थों का उपयोग बढ़ने से जीवाणुओं को भोजन उपलब्ध हो जाता है। क्षय की प्रक्रिया तेज है। मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की मात्रा बढ़ने से जल धारण क्षमता बढ़ जाती है क्योंकि खेत में केंचुओं की संख्या बढ़ जाती है।
  • जलामृत का एक फायदा यह भी है की इस में मौजूद पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ मिट्टी में नमी बनाए रखते हैं।  जिस से कम बारिश होने पर भी पेड़ोंपर ज्यादा असर नही पड़ता।
  • जीवामृत का उपयोग करके खेत की सब्जियों और फलों की सर्वोत्तम प्रति प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा फलों और सब्जियों के स्वाद में भी सुधार होता है।

किसान भाईयों रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं से अच्छा विकल्प है जीवामृत, महज 1 सप्ताह में बनकर तैयार होता है, और इस की लागत भी रासायनिक खतों से काफी कम होती है। इस के साथ ही इस जैविक खाद से  उपजने वाला अनाज या फल सब्जियां रसायन मुक्त होता है।

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