सब्जियों की जैविक खेती 2022- समय की है मांग

सब्जियों की जैविक खेती – समय की है मांग

हम सभी को पता है की हमारे दैनंदिन जीवन में सब्जियों का क्या महत्व है| विशेष रूप से हमारे देश में जहाँ शाकाहार का प्रचलन ज्यादा है, यहाँ विशेष रूप से स्वास्थ के साथ साथ विशेष स्वाद एवं रूचि के लिए भी भोजन में सब्जियों का अधिक उपयोग होता आया है, और आगे भी होता रहेगा।

सब्जियों की जैविक खेती
सब्जियों की जैविक खेती

 

अब बात करते है सब्जियों के खेती की, सब्जियों की जैविक खेती, जब हमारे देश में हरित क्रांति हुई और देश में सिंचाई के कई साधनों में विकास हुआ, साथ ही नवीनतम एवं उन्नतिशील किस्मों और रासायनिक उर्वरकों में बड़ी मात्रा में संशोधन हुआ, जिस से फसलों के उत्पादन में काफी बढ़ोत्तरी हुई|

लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया खेती में फसलों की उत्पादकता में स्थिरता या गिरावट आने लगी है| इसका प्रमुख कारण भूमि की उर्वराशक्ति में ह्रास होना है|

विगत कुछ सालों में कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के अवास्तव एवं असंतुलित उपयोग के कारण खेती में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी आ गयी है, जिस से फसलों की पैदावार में गिरावट आयी है, साथ ही विभिन्न कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है|

सब्जियों की खेती सीधे तौर पर मानवीय स्वास्थ से जुडी है, ज्यों की ज्यादा गंभीर है, क्योंकि इनमें अन्य फसलों की तुलना में रासायनिक उर्वरकों और कृषि-रक्षा-रसायनों का सब से अधिक प्रयोग हो रहा है, जिस के कारण स्वास्थ सम्बन्धित परेशानियाँ बढ़ रही है।

ऐसे परिस्थितियों में जरूरत है सब्जियों की जैविक खेती की। हम सब्जियों की जैविक खेती अपनाकर गिरते हुए मिट्टी स्वास्थ्य और वातावरणीय प्रदूषण की समस्या को कम किया जा सकता है, और मनुष्य की पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है| इस लेख में सब्जियों की जैविक खेती और सब्जियों की जैविक खेती के प्रमुख घटक, जैविक उर्वरक एव किटकनाशक के लाभ के बारे में बताते है|

सब्जियों की जैविक खेती क्या है?

सब से पहले हम जैविक खेती की बात करते है, जैविक खेती खेत में फसल उत्पादन की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें रासायनिक उत्पादों जैसे रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, फरूंदनाशी, कवकनाशी, खरपतवारनाशी, वृद्धिनियामक इत्यादि का प्रयोग न करके जैविक संसाधनों एवं पदार्थों की मदद से जैविक खाद, जैव उर्वरक, हरी खाद, जैविक कीटनाशक तैयार किये जाते है और खेत में साथ ही फसलों पर प्रयोग किये जाते है | इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी, पौधों, पशुओं और मनुष्यों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फसलों की उत्पादकता बढ़ाना है|

सब्जियों की जैविक खेती कैसे करें

सब्जियों की जैविक खेती के लिए हमें सब से पहले मिटटी की उर्वरकता को बरक़रार रखना होगा, जिस के लिए हमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बिलकुल ही नही करना है, इसके लिए हमें जैविक खाद जैसे, गोबर की खाद, कम्पोस्ट-खाद, वर्मीकम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट इत्यदि का प्रयोग आवश्यक है।

वर्मी कम्पोस्ट खाद कैसे बनाएं इस की विस्तृत जानकारी हमने इस आर्टिकल में दी है, निचे दिए गये लिंक पर क्लिक करें।

वर्मीकम्पोस्ट के फायदे | केंचुआ खाद के फायदे

इस के साथ ही जैविक खाद के रूप में फसलों के अवशेष, जानवरों के हड्डी का चूरा, मछली की खाद, विभिन्न प्रकार की खलियों और गोमूत्र एवं सींग से तैयार बायोडायनामिक खााद का भी प्रयोग किया जाता है|

किट एवं रोगों के रोकथाम के लिए जैविक उपाय

सब्जियों की जैविक खेती में किट एवं रोगों के रोकथाम के लिए हमें किस्सी भी तरह से रासायनिक कीटनाशकों, फफूंद नाशकों का उपयोग नही करना है, बल्कि इस के लिए जैविक कीटनाशकों को तैयार कर उसे इस्तेमाल करना है|

सब्जियों में किट एवं रोग प्रबंधन के लिए हमें जरुरी है की, सब्जियों की प्रतिरोधी किस्मों और रोग रहित बीजों का प्रयोग करें| प्रभावी फसल-चक्र, बहु-फसली प्रणाली, ट्रैप-फसल के प्रयोग और कीटों के प्राकृतिक वास में बदलाव से नाशी जीवों को नियंत्रित किया जा सकता है|

साथ ही किट प्रबंधनके लिए खेती में कीटों के अंडों तथा लार्वो को एकत्र करके नष्ट करना, खेत में चिड़ियों के बैठने के स्थान की व्यवस्था करना, प्रकाश पिंजरा लगाना, फेरोमोन ट्रैप या रंगीन चिपचिपी पट्टी का उपयोग यह सभी जैविक उपाय हैं|

सब्जियों की खेती में नाशी जीवों का भक्षण करने वाले जीव-जंतुओं जैसे ट्राइकोग्रामा , चेलोनस बर्नी 1, या क्राइसोपरला जिव-जंतुओं का प्रयोग करके नाशी जीवों का नियंत्रण किया जा सकता है|

अन्य कीटनाशक

इस के साथ ही हम बहुत से वृक्ष और पौधों की पत्तियों, बीजों के अर्क का उपयोग नाशीजीवों के नियंत्रणके लिए कर सकते है| इनमें से कुछ प्रचलित तथा प्रभावी कीटनाशकों का विवरण निम्नलिखित है, जैसे- नीम, गोमूत्र,

नीम- नीम अर्क और तेल विभिन्न प्रकार के कीटों जैसे- ग्रास हॉपर, लीफ हॉपर, एफिड, जैसिड, डायमंड बैक मोथ, इल्ली इत्यादि की रोकथाम में काफी प्रभावी पाया गया है|

गोमूत्र- एक लीटर गोमूत्र को 20 लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव करने से अनेक कीटों और रोगाणुओं के नियंत्रण के साथ-साथ पौधों की वृद्धि पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है|

सब्जियों की जैविक खेती के लाभ

  • जैविक खेती से फायदा यह होता है की भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है|
  • सब्जियों की जैविक खेती से उगाई गयी सब्जियों का स्वाद और पौष्टिकता काफी अच्छी होती है|
  • जैविक विधि से उगाई गई सब्जियाँ और अन्य उत्पाद हानिकारक रसायनों से मुक्त होते हैं| जो मानवीय स्वास्थ के लिए भी लाभदायक होती है।
  • जैविक सब्जियों से किसान भाईयों को भीअलभ होता है, क्यों की जैविक सब्जियोंका बाजार मूल्य ज्यादा होने से अधिक लाभ मिलता है|
  • साथ ही जैविक खेती से पर्यावरण सुरक्षित रहता है|

8 thoughts on “सब्जियों की जैविक खेती 2022- समय की है मांग”

    • आप की कमेंट्आस के लिए धन्यवाद ! आप को विशेष तौर पर सूचित करना हमारा कर्तव्य है। जल्द ही आप की सुचना को ध्यान में रखते हुए हम आप से संपर्क करेंगे।

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  1. किसानों को पंचगव्य जैविक खाद कैसे मिलेगा कृपया कोई मोबाइल नंबर व्हाट्सएप नंबर भी प्रसारित करें

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    • आप के द्वारा दी गयी विशेष टिप्पणीके लिए आभार व्यक्त करते हुएं आप की सुचना पर जल्द ही अमल करने के लिए प्रयासरत रहेंगे।

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    • आप की कमेंट के लिए धन्यवाद…जैविक सब्जियां बेचने के सन्दर्भ में आप का सवाल महत्वपूर्ण है..कर्तव्य के साथ इस सम्बन्धित विस्तृत जानकारी एक लेख के माध्यम से जल्द ही प्रस्तुत करेंगे.

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